Friday, March 1, 2013

Deepak Pandey - Ab Na Koi Taj Raha Na Hi Koi Takht Raha


Deepak Pandey - Ab Na Koi Taaj Raha 

अब न कोई ताज रहा
 न ही कोई तख्त रहा 

बिना छाँव का मैँ 

सूखा सा दरख्त रहा

नशा तरक्की मुझ पर
 यूँ चढा जालिम
एक कठपुतली सा 
मैँ बेजुबान भक्त रहा

अपने भी उसूल थे 
अपनी भी कोई इज्जत थी
अपने जमाने मेँ मैँ 
आदमी बडा सख्त रहा 

स्वार्थवश मैँने वहशियोँ 
को भी माफ किया
मैँ मसीहा था मेरा 
भी एक वक्त रहा

सामने पडा जो आईना
 तो ये मंजर देखा
खाली था आईना मेरा
 न कोई अक्स रहा

अपनोँ मेँ खो गया इतना 
कि हुआ तन्हा
दर्द और पीडा का मुझसे 
न कोई रब्त रहा

-- दीपक पाण्डे J N V नैनीताल


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2 comments:

स्वार्थवश मैँने वहशियोँ
को भी माफ किया
मैँ मसीहा था मेरा
भी एक वक्त रहा
wakt wakt ki bat hae,sab ki palon men kuch badal jata hae,
gujre wakt ko kya rona,jab apne hisse andheri rat hae.
DEEPAKJI SUNDAR RACHNA HETU AABHAR

आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी यह विशेष रचना को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज के ब्लॉग बुलेटिन - आर्यभट्ट जयंती - गणितज्ञ, खगोलशास्त्री, वैज्ञानिक (४७६-५५० ईस्वी ) पर स्थान दिया है | बहुत बहुत बधाई |

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