जिन्दगी के अब
ये कैसे मोड आये हैँ
अपने तो दूर अपने
साये को भी छोड आये हैँ
चरागोँ से भी गर्मी
का अहसास होता है
गाँव मेँ अपना
अलाव तोड आये हैँ
इक उम्र हुई अपनोँ
से रूबरु नहीँ हुए
अजनबीयोँ से आज
रिश्ता जोड आये हैँ
-- Deepak Pandey
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इक उम्र हुई अपनोँ
से रूबरु नहीँ हुए
अजनबीयोँ से आज
रिश्ता जोड आये हैँ
बेहतर रचना बधाई
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