Friday, February 1, 2013

Deepak Pandey - Jindagi Ke Ab Ye Kaise Mod Aaye Hain





जिन्दगी के अब
 ये कैसे मोड आये हैँ 

अपने तो दूर अपने 
साये को भी छोड आये हैँ 

चरागोँ से भी गर्मी
 का अहसास होता है

गाँव मेँ अपना 
अलाव तोड आये हैँ 

इक उम्र हुई अपनोँ
 से रूबरु नहीँ हुए 

अजनबीयोँ से आज
 रिश्ता जोड आये हैँ

-- Deepak Pandey


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1 comments:

इक उम्र हुई अपनोँ
से रूबरु नहीँ हुए

अजनबीयोँ से आज
रिश्ता जोड आये हैँ

बेहतर रचना बधाई

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