Monday, February 4, 2013

Sandhya Jain - E Chand Tum To Meri Tanha Raato Ke Gawaah Ho


Sandhya Jain - E Chand Tum To Meri
Tanha Raato Ke Gawaah Ho


ऐ चाँद तुम तो मेरी

तन्हां रातों के गवाह हो
मेरी करवटों के गवाह हो

मेरे बिस्तर की हर
शिकन की तरह
मैंने तो प्यार को
भस्म की तरह
समूची काया पे
मल रक्खा हैं

जैसे कि ऐ चाँद
तुमने बादल की
राख को अपने
मुख पे मल रक्खा हैं

अब किसी की बुरी नज़र
या किसी का काला साया
दोनों ही बेअसर हैं

ऐ चाँद तुम तो मेरी
तन्हां रातों के गवाह हो 

-- Sandhya Jain


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3 comments:

प्रभावशाली ,
जारी रहें।

शुभकामना !!!

आर्यावर्त
आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।

क्या यह कविता मेरे पै लेखि हो | ऐसा ही लिखते रहे |

क्या पता हम भी पढ़ते पढ़ते कभी ना कभी कवि बन जाएँ

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