जीवन के इस पड़ाव पर,
उम्र के इस बहाव में
कितने सारे प्रश्नों के
उत्तर नहीं पाता हूँ...
अनदेखी, अनजानी,
बैगानी राहों पर......
मैं बस चलता ही जाता हूँ,
मैं बस चलता ही जाता हूँ
कुछ अनसुलझे हालात लिए,
कुछ अनकहे अल्फाज़ लिए
कुछ अनकहे अल्फाज़ लिए
कुछ बिगड़े हुए सुरे लिए,
कुछ बिखरे हुए साज़ लिए
कुछ टुटे हुए ख्वाब लिए,
कुछ अनसमझे जज्बात लिए....
मिला ना जिसको अंजाम
वो आगाज़ लिए..............
मैं बस चलता ही जाता हूँ,
मैं बस चलता ही जाता हूँ
दिल में कुछ भूली बिखरी यादें सहेजे
होठों पर कुछ अनकही बातें समेटे
अनजानी राहों पर दूर तक अकेले ही
कुछ सवालों के जवाब ढूढ़ने.........
मैं हर रोज निकल जाता हूँ.....
मगर
जीवन के इस पड़ाव पर,
उम्र के इस बहाव में
कितने सारे प्रश्नों के
उत्तर नहीं पाता हूँ.......
मैं बस चलता ही जाता हूँ,
मैं बस चलता ही जाता हूँ...
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