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| Dr Kumar Vishwas |
जब छुआ साथ तुलसी चौरा ,
आखोँ में साँसों को खींचे ,
तुम से जो वादा किया कभी ,
पड़िया जी के पीपल नीचे ,
तुम ने चाहा था खुश रहना
खुद, ख़ुशी सदा मुझ से सीखे ,
दुनिया भर के संकल्प सतत ,
पूरे होते मुझ में दीखे ,
खुद से अनुबंध किया है अब ,
मन को निर्बंध किया है अब ,
गत-विगत मुक्त हो सकने का
सम्पूर्ण प्रबन्ध किया है अब ,
इस नए साल के पहले दिन ,
तुम से बाहर सोचा तो है ,
मन-प्राण सुमरनी छोड़ेंगे ,
सुनते तो है होता तो है ,
काफी है.........!
Dr Kumar Vishwas
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1 comments:
प्रभावशाली ,
जारी रहें।
शुभकामना !!!
आर्यावर्त
आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।
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