Thursday, January 10, 2013

Sandhya Jain - E Raat Jara Tham Ke Gujar



Sandhya Jain - E Raat Jara Tham Ke Gujar

देखो कहीं छिप
 ना जाए चाँद 

ऐ रात ज़रा 
थम के गुज़र...

नींद ज़रा ज़रा
 आने को हैं 
ऐ रात ज़रा 
थम के गुज़र....

ख्वाबों में करनी है 
उनसे मुलाक़ात 
ऐ रात ज़रा 
थम के गुज़र....

चुपचाप खो जाए 
एक दूजे में हम 
ऐ रात ज़रा
 थम के गुज़र....

अपनी धडकनों में उनकी
 धडकनों को सुनूँ
ऐ रात ज़रा 
थम के गुज़र....

बरसा दूँ अपने
 प्रेम का नेह उनपर 
ऐ रात ज़रा 
थम के गुज़र.....

-- Sandhya Jain


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1 comments:

प्रभावशाली ,
जारी रहें।

शुभकामना !!!

आर्यावर्त (समृद्ध भारत की आवाज़)
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