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| Sandhya Jain - E Raat Jara Tham Ke Gujar |
देखो कहीं छिप
ना जाए चाँद
ऐ रात ज़रा
थम के गुज़र...
नींद ज़रा ज़रा
आने को हैं
ऐ रात ज़रा
थम के गुज़र....
ख्वाबों में करनी है
उनसे मुलाक़ात
ऐ रात ज़रा
थम के गुज़र....
चुपचाप खो जाए
एक दूजे में हम
ऐ रात ज़रा
थम के गुज़र....
अपनी धडकनों में उनकी
धडकनों को सुनूँ
ऐ रात ज़रा
थम के गुज़र....
बरसा दूँ अपने
प्रेम का नेह उनपर
ऐ रात ज़रा
थम के गुज़र.....


1 comments:
प्रभावशाली ,
जारी रहें।
शुभकामना !!!
आर्यावर्त (समृद्ध भारत की आवाज़)
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