Sunday, December 30, 2012

Waseem Barelvie - Usi se bichhadne ka dar jane kyun tha


Waseem Barelvi


कुछ अनजाना होने का 
डर क्यों था 
सफ़र में ये ज़द सफ़र 
जाने क्यूँ था 

जो बर सफ़र हैं 
वही हमसफ़र हैं
तेरा साथ ही मुख़्तसर 
जाने क्यूँ था 

जो मेरे लिए 
सिर्फ मेरे लिए था 
उसी से बिछड़ने का
डर जाने क्यूँ था 

-- वसीम बरेलवी 



kuchh anjana hone ka 
dar jane kyun tha
safar mein ye zad safar 
jane kyun tha 

jo bar safar hain 
wahi humsafar hain
tera sath hi mukhtasar 
jane kyun tha

jo mere liye 
sirf mere liye tha
usi se bichhadne ka
dar jaane kyun tha

-- Waseem Barelvi

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2 comments:

सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार हम हिंदी चिट्ठाकार हैं

प्रभावी लेखन,
जारी रहें,
बधाई !!

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