Friday, April 25, 2014

Deepak Pandey : Harana Pad Gaya


जिन दरख्तोँ की छाँव मेँ 
खेलते थे गाँव मेँ 
काँटे लगे जो पाँव मेँ 
सहलाये जख्म 
उसी की पनाह मेँ 

उन्हीँ दरख्तोँ को अपने हाथ से 
गिराना पड गया 
अपने को अपने आप से 
हराना पड गया 



नये जमाने की दौड मेँ 
तरक्की की इस होड मेँ 
जीवन की जोड तोड मेँ 
यही था मुनासिब 
मन को इसी बात से 
बहलाना पड गया 

अपने को अपने आप से
 हराना पड गया 
गोद मेँ जिसके बडे 
कंधोँ मेँ जिसके चडे 
खिलोनोँ को जिद पे अडे 

अपने ही हाथ अग्नि मेँ 
जलाना पड गया 
अपने को अपने आप से 
हराना पड गया 

दीपक पाण्डे J N V नैनीताल

Monday, April 21, 2014

Deepak Pandey : Mera Ghar Pukar Raha Hai


मेरा घर फिर 
मुझे पुकार रहा है
आज मेरी राह को 
निहार रहा है

मेरा उस घर मेँ क्या 
किरदार रहा है?
बचपन मेरा उस मिट्टी 
मेँ उधार रहा है
मेरा घर फिर मुझे 
पुकार रहा है



वो जमीँ अब जिसमेँ 
आम का दरख्त न रहा
अपनोँ के लिए अपनोँ के 
पास वक्त न रहा

अपनोँ के बीच आज 
कोई रब्त न रहा
रिश्ता वही आज सबको 
लगा गुहार रहा है
मेरा घर फिर 
मुझे पुकार रहा है

खेल का मैदान छोटी सी 
गली मेँ सिमट गया
पीछे बना एक झोपडा 
भी हट गया

न जाने कैसे एक 
विशाल वक्त कट गया
वो अतीत मेरा बचपन का 
जो गवाह रहा है
मेरा घर फिर मुझे 
पुकार रहा है

-- Deepak Pandey

Friday, April 18, 2014

Adarsh Tiwari Harf : Mujhko Mujhse Loot Gaya


मै तो चलता गया जगत मे,
पीछे था कुछ छूट गया। 
कोई प्रेमी ऐसा आया ,
मुझसे मुझको लूट गया।।

कंचन वर्णो मे लिपटी थी,
शर्मा के खुद मे सिमटी थी, 
देख रहा था उसी का सपना ,
जगा कि वो सब टूट गया।।



पहले तो अनजान थि मुझसे,
नही हुई पहचान थि उससे।
पर जब से देखा मैने उसको,
पानी का न घूँट गया।।

यही था प्रेमी ऐसा जो,
मुझसे मुझको लूट गया।।

-- Adarsh Tiwari 'Harf'

Tuesday, April 15, 2014

Adarsh Tiwari Harf : Abhi Kuch Baat Baaki Hai


"अभी कुछ बात बाकी है ।"

अभी कुछ बात बाकी है,
कुछ मुलाकात बाकी है।
जो तेरे संग बितानी है,
अभी कुछ रात बाकी है।।

मै तेरा हूँ,तू मेरी है,
अभी कुछ कह नही सकता ।
मगर तुम बात ये मानो,
कि तेरे बिन रह नही सकता ।।



जो तुझको बताने हैं,
कई जज्बात बाकी है।
अभी कुछ---------------।

मुझे भी खौफ तेरा है,
तुझे भी खौफ मेरा है।
मगर ये पंछी न जाने क्यूँ 
बनाए खौफ मे ही बसेरा है।।

अभी तुझको सुनाएगा "आदर्श", 
कई अहसास बाकी हैं।

अभी कुछ बात------------।।

-- Adarsh Tiwari 'Harf'

Friday, April 11, 2014

Dinesh Gupta Din : Teri Julf Ke Badal


तेरी जुल्फ के 
बादल को 
अब जरा 
लहर जाने दे

तेरे होठों की 
शबनम को 
अब जरा बिखर 
जाने दे


डूबना चाहता हूँ 
मैं अब इन 
झील सी आँखों 
की गहराई में
तू मुझे जिस्म से 
रूह में उतर जाने दे

दिनेश गुप्ता 'दिन'

Tuesday, April 8, 2014

Chitra Kumar Gupta : Aapki Aamad Se Dil Mein Charag Jalne Lage


आपकी आमद से दिल 
में चराग जलने लगे,
मुरझाये चमन में भी 
गुलाब खिलने लगे, 

सालों के मानिंद गुजर 
रही थी हर घड़ी , 
अब तो वक़्त के भी 
पर निकलने लगे,

Chitra Kumar Gupta
Aapki Aamad Se Dil Mein Charag Jalne Lage

तीरगी फैली हुयी थी 
स्याह रात की,
बनके सूरज तुम 
फलक पर आने लगे,

होने लगा है हर तरफ 
मंजर सहर का ,
दरख्तों पर परिंदे 
चहचहाने लगे,

ऐ खुदा, शुक्रिया 
तेरी नवाजिशों का,
दिलवर के अब मुझे 
दीदार होने लगे, 

Chitra Kumar Gupta

Thursday, April 3, 2014

Deepak Pandey : Apne Hi Is Aham Me


अपने ही इस अहं मेँ 
यूँ चूर हो गये ।
अपनोँ से अपने आप 
ही हम दूर गये ॥

जिन दरख्तोँ के साये मेँ 
बीता था ये बचपन ।
उन दरख्तोँ को काटने 
को हम मजबूर गये ॥



जिन्दगी तुझे अपने अन्दाज 
मैँ जीने चले थे हम ।
खुद जिन्दगी के 
फैसले मन्जूर गये ॥

बन्दगी मेँ तेरी ए खुदा 
इतने हुए बदनाम ।
बदनाम होते होते
 हम मशहूर गये ॥

अपनो ने अपने आप ही 
इतने दिये जखम ।
रिसते हुए वो जख्म 
भी नासूर गये ॥

-- Deepak Pandey

Saturday, March 29, 2014

Dr Vishnu Saxena Kavita : Samandar Dikhega Nahi


समन्दर दिखेगा नहीं
.......................


तुम नदी कहकहों की
तुम्हें आँख में
आँसुओं का समन्दर
दिखेगा नहीं।
सब्र का बाँध यूँ
तो है मज़बूत
पर टूट जायेगा फिर
कुछ बचेगा नहीं॥

Dr Vishnu Saxena

तुम तो कादम्बिनी
जैसी फूली फली
और् शहरों के अधरों
 की सरिता रहीं,
मैं धर्मयुग सा हर
रोज़ छोटा हुआ
पर कटे हँस की
 सी उडानें भरीं,
ये तो तय है कि
नि:सार संसार में
सार गर्भित जो होगा
 बिकेगा नहीं।

जो भी गिर कर
उसूलों से मुझको मिला
जाने क्यों हाथ उसको
 बढा ही नहीं,
डाल से जो गिरा है
 धरा पर सुमन
आज तक देवता पर
 चढा ही नहीं,
आत्म सम्मान के
पेड़ का ये तना
टूट जायेगा पर
 अब झुकेगा नहीं॥


ओ मेरे देवता,
मुझको ये तो बता
मेरी पूजा में क्या-क्या
कमी रह गयी,
मेरे अधरों पे
 भरपूर मुस्कान थी
मेरी आँखों में फिर
 क्यों नमी रह गयी,
जो भी मिल जायेगा
लूँगा सम्मान से
 हाथ ये याचना को
बढेगा नहीं॥

Dr Vishnu Saxena

Monday, March 24, 2014

Bhawana Prabha : Wo Jab Toote Aitbar


wo jab toote aitbar 
kisi par,
to ruswai na ho,
ho jae jab aitbar kisi 
par to judai na ho,
jab ho rahi ho mukammal 
rishton ki duniya
to dua hai meri 
rishton se badhkar 
duhai na ho.



Wo ik sham jo 
tthahar jae,
to tanhai na ho,
tthahri koi 
sham guzar jae,
to jamhai na ho,
gar kaid kar le koi 
khoobsurat ehsaas,
to dua hai meri,
aisi kaid ki koi 
rihai na ho

-- Bhawana Prabha

Thursday, March 20, 2014

Adarsh Tiwari Harf : Jaam Peete Hain Bahut


जाम पीते हैं बहुत,
होश रहता नहीं
ये मुनासिफ नहीं हैं, 
शहर के लिए।

इश्क करके इन्हें , 
छोड़ दो इस कदर
य तड़पते रहें , 
उम्र भर के लिए ।

जख्म देना है तो ,
तड़पाते रहो
ये काबिल नहीं हैं ,
जहर के लिए।

Adarsh Tiwari 'Harf'
Jaam Peete Hain Bahut

ये यारों भरोसे के 
लायक नहीं हैं
छोड़ दो साथ इनका ,
हर डगर के लिए।

'हर्फ ' नजरों अपने 
छुकाए रहो 
इनकी नजर है 
खतरा नजर के लिए।

-----------------आदर्श'हर्फ'

 
  • Followers